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विकास की ताकत बनें शहर


विकास की ताकत बनें शहर

जयंतीलाल भंडारी Updated Mon, 17 Dec 2018 07:05 PM IST

जयंतीलाल भंडारीइन दिनों पूरी दुनिया में विश्व के प्रतिष्ठित थिंकटैंक ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स द्वारा हाल ही में प्रकाशित दुनिया के 780 बड़े और मझोले शहरों की बदलती आर्थिक तस्वीर और आबादी की बदलती प्रवृत्ति से संबंधित रिपोर्ट को गंभीरतापूर्वक पढ़ा जा रहा है।विज्ञापनइस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2019 से 2035 तक दुनिया के शहरीकरण में काफी बदलाव देखने में आएगा। यद्यपि दुनिया के अधिकांश विकसित शहर 2035 में भी अपना दबदबा बनाए रखेंगे, पर विकसित होते नए शहरों में भारत शीर्ष पर होगा। भारत के प्रमुख शहर दिल्ली, मुंबई व कोलकोता अपना दबदबा बनाए रखेंगे। रिपोर्ट में  कहा गया है कि विकसित होते शहरों की रफ्तार के मामले में वर्ष 2035 में टॉप के 20 शहरों में से पहले 17 भारत के होंगे।

निस्संदेह नए भारतीय शहरों के बारे में जो अध्ययन रिपोर्टें प्रस्तुत हो रही हैं, उनमें यह महत्वपूर्ण तथ्य उभरकर सामने आ रहा है कि अब भारत में तेजी से बढ़ती जनसंख्या और तेज गति से होते विकास के कारण तीव्र शहरीकरण को नहीं रोका जा सकता है।

यद्यपि एक ओर भारत के लिए शहरीकरण की चुनौतियां हैं, लेकिन दूसरी ओर आर्थिक  विकास और वैश्विक व्यापार बढ़ाने की भी भारी संभावनाएं हैं। इतिहास गवाह है कि जिन देशों में शहरों की जितनी अधिक प्रगति होती है, वहां आर्थिक अवसरों की उपलब्धता उतनी ही अधिक होती है।

निश्चित रूप से जहां बढ़ती जनसंख्या के कारण शहरों पर आबादी का दबाव बढ़ रहा है, वहीं  शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के अभाव में गांवों से लोगों का पलायन शहरों की ओर बढ़ता ही जा रहा है। वस्तुत: इस समय देश के अधिकांश शहर विकास और सामान्य जीवन स्तर के लिए मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं। बिजली-पानी की भारी कमी, खराब सड़कें और भारी प्रदूषण भारतीय शहरों की बड़ी कमियां हैं। विकसित देशों में किसी शहर की शक्ल बनाने में वहां की म्यूनिसिपालिटी का बड़ा योगदान होता है। पर हमारे देश में म्यूनिसिपालिटी की अपनी कोई आर्थिक हैसियत ही नहीं बन पाई है। सड़कें जरा-सी बारिश में बदहाल हो जाती हैं। आने-जाने के साधनों और ट्रैफिक जाम संबंधी मुश्किलें रोज दिखाई देती हैं। शहरों में जिस तेजी से कंक्रीट के जंगल खड़े हुए हैं, उस रफ्तार से पेड़ नहीं लग पाए। इस लिहाज से देश के ज्यादातर शहरों में नवीनीकरण और वर्तमान व्यवस्थाओं में आमूल-चूल बदलाव लाने की जरूरत है।

जाहिर है, हमें भी देश में मौजूदा शहरों को उपयुक्त बनाने और अच्छे नए शहरों के निर्माण के लिए तेजी से कदम बढ़ाने होंगे। जरूरी है कि शहर सुनियोजित रूप से विकसित हों, आधुनिक बुनियादी सुविधाओं, यातायात और संचार साधनों से सुसज्जित हों। शहरों में विकास की मूलभूत संरचना, मानव संसाधन के बेहतर उपयोग, जीवन की मूलभूत सुविधाओं तथा सुरक्षा कसौटियों के लिए सुनियोजित प्रयास आवश्यक हैं। हमें नए शहरों की मौजूदा नई जरूरतों के लिए रोडमैप बनाना होगा। नए शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल उपयुक्त होगा।

वैश्विक जरूरतों की पूर्ति करने वाले शहरों के विकास की दृष्टि से भारत के लिए यह एक अच्छा संयोग है कि अभी देश में ज्यादातर शहरी ढांचे का निर्माण बाकी है और शहरी मॉडल को परिवर्तित करने और बेहतर सोच के साथ शहरों के विकास का पर्याप्त समय मौजूद है। हम आशा करें कि सरकार देश के शहरों को एक  बेहतर सोच, दृढ़ इच्छाशक्ति और सुनियोजित रणनीति से सजाएगी-संवारेगी, ताकि हमारे ये शहर राष्ट्रीय और वैश्विक जरूरतों की पूर्ति के अनुरूप लाभप्रद दिखाई दें और देश के आर्थिक विकास की बुनियादी ताकत बन जाएं।  

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