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10 साल के संघर्ष से नाज़िया ने बदला 100 साल का इतिहास



"मैं नक़ाब पहनती थी, पहनती रहूंगी. मुझे यक़ीन है कि लिहाज के साथ पर्दानशीं रहकर भी तब्दीली की लकीर खींची जा सकती है."

एक सांस में ये कहते हुए नाज़िया तबस्सुम पल भर के लिए खामोश हो जाती हैं.

"बस जज़्बात और जुनून हो. मुस्लिम महिलाएं-लड़कियों के हक-हुकूक की वकालत करना, सड़कों पर आवाज़ उठाना कोई गुनाह नहीं."

32 साल की नाज़िया इन दिनों झारखंड में सुर्खियों में है. दरअसल हाल ही में उन्होंने रांची में अंजुमन इस्लामिया के चुनाव में महिला सदस्य के तौर पर वोट दिया है.

अंजुमन के सौ सालों के इतिहास में यह पहली दफ़ा हुआ है. दरअसल अब तक किसी भी महिला को अंजुमन का सदस्य नहीं बनाया गया था.


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https://www.bbc.com/hindi/india-44171662


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